ऐसे रिश्तों का सबसे भयावह पहलू वह मानसिक आघात है जो पीड़ित झेलता है। एक पोती के लिए उसका दादा मार्गदर्शक और रक्षक होता है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो उस बच्चे के मन में रिश्तों के प्रति आजीवन नफरत और अविश्वास पैदा हो जाता है। यह घाव शरीर से ज्यादा आत्मा पर गहरा होता है, जिसे 60fps की 'Full-HD' स्पष्टता भी कभी नहीं दिखा सकती।
अक्सर मनोरंजन या कहानियों के नाम पर ऐसे विषयों को 'सनसनीखेज' बनाकर पेश किया जाता है। लेकिन असल जिंदगी में यह कोई फिल्मी ड्रामा नहीं, बल्कि एक घिनौना अपराध है। 'सगे संबंध' जब अपनी गरिमा खो देते हैं, तो वे केवल कानूनी नजर में ही नहीं, बल्कि मानवता की नजर में भी अक्षम्य हो जाते हैं।
4. पर्दे के पीछे की कड़वी सच्चाई
2. नैतिकता का पतन और सामाजिक विकृति